लोरी' प्रतियोगिता | प्रतियोगिताएं | आजादी का अमृत महोत्सव

लोरी प्रतियोगिता

प्रविष्टियां 31/10/2021 से शुरू होंगी और राष्ट्रीय स्तर का फाइनल 08/03/2022 (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस) पर आयोजित किया जाएगा।

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Lori Contest

परिचय

भारत की विविध संस्कृति और समृद्ध परंपराओं को मानव सभ्यता की कुछ उन्नत और सबसे प्राचीन में से एक माना जाता है। महत्वपूर्ण अवसरों पर मंत्रों का जाप करने से लेकर हमारे द्वारा गाए जाने वाले लोक गीतों तक - भारत वास्तव में एक ऐसा देश है जो हमेशा विस्मित और आश्चर्यचकित करता है।

जैसे हर भारतीय क्षेत्र की अपनी अनूठी परंपराएं, व्यंजन और संगीत वाद्ययंत्र होते हैं, वैसे ही हर भारतीय क्षेत्र में लोरी का अपना संग्रह भी होता है।

लोरी हमारे बचपन की सबसे शुरुआती यादों का गठन करती हैं – यह कहानी कहने का सबसे प्राथमिक रूप है। सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि दादा-दादी और पूरा परिवार भी बच्चे को लोरी सुनाता है। यहां लोरियों के माध्यम से छोटे बच्चों में संस्कार डाले जाते हैं और उन्हें संस्कृति से परिचित कराया जाता है। लोरी की भी अपनी विविधता है। अक्सर, लोरी हमारे स्थानीय परिवेश, प्रकृति, स्थानीय नायकों और स्थानीय ऐतिहासिक महत्व के मामलों के इर्द गिर्द लिखी जाती हैं। असम के निसुकानी गीत से लेकर तमिलनाडु के थलट्टुपातु तक, और गुजरात की लोरी से लेकर कन्नड़ लालीहादु तक- प्रत्येक क्षेत्र में न केवल बच्चों को सुलाने का अपना तरीका होता है, बल्कि साथ ही साथ यह उन्हें पारिवारिक मूल्यों, स्थानीय संस्कृति और प्रथाओं के बारे में शिक्षित भी करता है।

बच्चों के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का प्यार अक्सर उनकी कई व्यक्तिगत बातचीत और अद्वितीय आउटरीच जैसे परीक्षा पे चर्चा और एक्जाम वॉरियर्स किताब के माध्यम से प्रदर्शित होता है।

तेजी से डिजिटल होती दुनिया में, इस अद्भुत प्रथा और हमारी पारंपरिक लोरियों को भी नए तरीकों से सामने लाने की जरूरत है – फिर चाहे वो नए स्वरूपों में सुनाई गईं वही सदियों पुरानी कहानियां हों या आधुनिक समय में सुनाई गई नई कहानियां हों। इस खूबसूरत परंपरा को पुनर्जीवित करने और इसके साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थानीय रचनाओं को संरक्षित करने के लिए, हम पूरे भारत में माता-पिता, अभिभावकों और बच्चों के लिए लोरी प्रतियोगिता का आयोजन कर रहे हैं।

चयन मानदंड

अपनी प्रविष्टियां भेजने के लिए प्रत्येक भारतवासी को आमंत्रित किया जाता है।

देशभक्ति कविताएं, गीत, या ऐसा कुछ जिसे हर घर में माताओं द्वारा अपने छोटे बच्चों को आसानी से सुनाया जा सकता है, प्रतियोगिता के लिए पात्र होंगे। इन लोरियों में आधुनिक भारत, 21वीं सदी के भारत की दृष्टि और उसके सपनों का संदर्भ होना चाहिए।

प्रतिभागियों को अपनी मातृभाषा में लोरी प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, लेकिन यदि प्रतिभागी एक से अधिक भाषाओं में पारंगत है तो वे अपनी पसंद की भाषा चुन सकते हैं।

प्रतियोगिता तीन चरणों में आयोजित की जाएगी ताकि स्थानीय कहानियों को प्रोत्साहित किया जा सके, विजेता घोषित किया जा सके और राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का मौका प्रदान किया जा सके।

जिला स्तर

एक विशेष रूप से गठित निर्णायक समिति द्वारा हर जिले से सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों का चयन किया जाएगा और जिला स्तर के विजेता की घोषणा की जाएगी। जिला स्तर का प्रत्येक विजेता आगे बढ़कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेगा।

राज्य स्तर

राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश राज्य क्षेत्र के सभी जिला विजेता राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश राज्य क्षेत्र स्तर के पुरस्कारों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। इसके बाद प्रत्येक राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश विशेष रूप से गठित निर्णायक मंडल द्वारा चुने जाने वाले राज्य स्तरीय विजेताओं का चयन करेंगे।

राष्ट्रीय स्तर

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर के विजेता अंतिम राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा करेंगे और इन प्रतिभागियों में से, राष्ट्रीय विजेताओं का चयन विशेष रूप से गठित निर्णायक समिति द्वारा किया जाएगा।

विजयी प्रविष्टियाँ

लोरी प्रतियोगिता में हमारे जीवंत देश के हर क्षेत्र से अद्वितीय लोरियों को शामिल किया जाएगा और जो लोरी सबसे बेहतर होगी उसे सार्वजनिक रूप से पुरस्कृत किया जाएगा और राष्ट्रीय दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

प्रस्तावित समयरेखा

क्रमांक विशेष स्थान दिनांक
1 जिला स्तर वेबसाइट – आभासी प्रारूप 31/10/2021 से 31/01/2022
2 राज्य स्तर टीबीडी 10/02/2022 से 28/02/2022
3 राष्ट्रीय स्तर टीबीडी 08/03/2022
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