समावेशी विकास | थीम 2.0 | आजादी का अमृत महोत्सव, भारत सरकार।

समावेशी विकास

Inclusive Development

समावेशी विकास

समावेशी विकास सामाजिक और वित्तीय स्थिति पर ध्यान दिए बिना सभी के लिए उचित अवसरों को बढ़ावा देता है, जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग को लाभ होता है।

पानी, स्वच्छता, आवास, बिजली आदि जैसी आवश्यक सेवाओं तक बेहतर पहुंच के साथ-साथ वंचित आबादी के लिए लक्षित प्रयास एक और अधिक समावेशी भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण मार्ग प्रशस्त करेंगे।

समावेशी विकास के लिए पहचाने गए खंड

  • जनजातीय और ग्रामीण समुदाय: जनजातीय जीवन शैली के सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं के बारे में जागरूकता; समुदायों को समाज में आत्मसात करना, जमीनी स्तर पर जनजातीय समुदायों को शिक्षित करना, साफ पानी, खाद्य सुविधाओं, स्वच्छता, बिजली, नेटवर्क कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच, उचित सड़कों के माध्यम से संबद्धता, पक्के घर; आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और उनकी क्षमता में अधिकतम वृद्धि करने के लिए ग्रामीण समुदायों का सहयोग करना; नई बुनियादी तकनीकों आदि का परिचय।
  • शारीरिक रूप से विकलांग: व्हीलचेयर और दृश्य-श्रव्य साधन जैसी सुविधाएं प्रदान करना; आसान पहुंच के लिए चल-सीढ़ी एवं सुनियोजित मार्गों की स्थापना; समाज में निःशक्तजन लोगों को शामिल करने पर जागरूकता; निःशक्तजन लोगों के साथ बातचीत करने के लिए व्यक्तियों और पेशेवरों का प्रशिक्षण; दिव्यांग जनों को कौशल एवं सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण आदि।
  • बैंक रहित क्षेत्र: ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बैंक खातों के महत्व के बारे में जागरूकता, वित्तीय साक्षरता, मोबाइल बैंकिंग आदि के बारे में जागरूकता।
  • महिलाएं: गर्भावस्था से पहले और बाद की देखभाल, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, बच्चों की देखभाल, कौशल-विकास, वित्तीय सुधार के अवसर आदि।
  • अन्य: अन्य समुदाय जिन्हें समावेशी अभियानों के माध्यम से लाभान्वित किया जा सकता है

संभावित क्षेत्र

  • वित्तीय सुधार और कौशल विकास: वंचित समुदाय के सदस्यों के लिए अवसरों तक पहुंच बढ़ाना, कौशल विकास (जैसे, स्थानीय और क्षेत्रीय कला रूप, कृषि, डेयरी फार्मिंग), नए व्यवसायों और स्वयं सहायता समूहों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच जैसे बैंकों, वित्तीय साक्षरता और शिक्षा आदि के रूप में।
  • शिक्षा: दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में शिविर लगाना, पिछड़े क्षेत्रों में पुस्तकों और लेखन सामग्री का वितरण, प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन करना, जनजातीय क्षेत्रों में जाने के लिए शिक्षकों और पेशेवरों को प्रशिक्षित करना और स्थानीय भाषा में शिक्षण आदि।
  • स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता: स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि, व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में जागरूकता, प्राथमिक चिकित्सा का बुनियादी ज्ञान, मासिक धर्म की देखभाल, प्रजनन स्वास्थ्य, टीकाकरण, स्वस्थ जीवन शैली के बारे में जागरूकता, मलप्रवाह का उचित निपटान आदि।
  • शिशु पालन: सीखने के समान अवसर, सामाजिक कौशल उद्यम के अवसर, संवादात्मक सत्र/शिविर, शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए विशेष स्कूली शिक्षा, समानता और विविधता के बारे में जागरूकता, बच्चों के लिए टीकाकरण आदि।
  • ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास: आवास, सड़कें, विद्युतीकरण, जलापूर्ति, अपशिष्ट जल प्रबंधन आदि।
  • कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता: समान वेतन, श्रम की अवधि, कार्यस्थल पर व्यवहार, विवाह की कानूनी उम्र के बारे में जागरूकता; अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना, जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना। पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (डीएवाई-एनयूएलएम), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण आदि।
  • उद्यमिता: उपलब्ध संसाधनों के बारे में जागरूकता बढ़ाकर, आर्थिक स्वतंत्रता के बारे में जागरूकता, ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका कमाने के सुरक्षित अवसरों आदि के द्वारा उद्यमशीलता को बढ़ावा देना।
  • अन्य: समावेशी वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने वाले अन्य क्षेत्र और खंड |
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